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क्षणों से छूट


क्षणों से छूट विस्मृति अरण्य में भटके भाव जो जीवित थे किन्तु मृत समान मृत थे किन्तु लेश श्वास सहित वोह कच्चे भोज ही.... स्वादिष्ट कविता है |

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