अतीत के आँगन मे फैली अमरबेल हो इस ओर से उस छोर तक यत्र तत्र बिखरी हुई स्मृतियो की नित नई कोपलों की स्वामिनी मेरे अमिट प्रेम की साक्षी हो तुम