मिज़ाज़ आज कुछ ख़राब हैं.. उठते कुछ सवाल बेहिसाब हैं..? मन, माया ने भ्रम में डाल रखा हैं.. सबों के चेहरों पे आज हिज़ाब हैं..? आदिम ही पूरा बदनाम हो चला हैं.. इतने पे पूछते हैं वो, ये क्या सवाल हैं..? जद्दोज़हद में नकेल कसके रखो साहिब.. हर ओर कहाँ तेरा ही रुबाब हैं..? ये देश हैं मेरा वीरों का फिर भी.. हर तरफ मचे हुए कितने बवाल हैं..??