खूबसूरत कमल बन गये हम, जबसे उनसे मिले...   एक सुलझी हस्ती बन गये हम, जबसे उनसे मिले...   बेरंग से थे रंगों भरे ज़हान में, कई रंगों की रंगोली बन गये हम, जबसे उनसे मिले...   वो आये इस तरह से जैसे चली आई हों हवायें मुझे छूने, उन हवाओं में महकते गुलाब बन गये हम, जबसे उनसे मिले...   हमने तो सोचा था ना गाएंगे कभी गीत मोहब्बत का, आज खुद ग़ज़ल बन गये हम, जबसे उनसे मिले...।