गेंदे के फूल.. ख्वाहिशों को खुद में समेटे हुए आपस में बातें करते हैं।   चाँद सितारों की नहीं, ना ही सूरज की, हवा, पानी और धूप की भी नहीं.. वो तो बातें करते हैं, मेरी और तुम्हारी। कभी हमारे झगड़ो के, किस्से बनाते हैं बड़े बड़े.. कभी हमारी मोहब्बत का, बखान करते हैं..   ये गेंदे के फूल, कुछ नहीं कहते हमसे। बस हमें सुनते और देखते हैं। और हमारी बातें करते हैं दूसरे फूलों से।   फिर तुलसी भी इनमें कूद पड़ती है। और गुलाब भी पीछे नहीं रहते। हम उनका फेवरिट टॉपिक बन गए हैं.. और वो हमारे लिए सिर्फ़ पौधे हैं।