दोगे ना साथ सदा के लिए खो तो नहीं जाओगे, बोलो किसी लम्हें सा। अंधेरे में परछाईं सा, या अमावस्या के चंद्र सा, दे कर सपनें छीन कर नींदे, उड़ ना जाना भ्रम सा। पाने से पहले ना पाने का डर, पा कर खो देने का डर, ये डर जीवन में विकसित हो, इससे पहले मिटा दो ये डर। आओ यूं कि तुम्हें सदा पाऊँ, पास हमेशा धड़कनों सा। बोलो, दोगे ना साथ सदा के लिए खो तो नहीं जाओगे किसी लम्हें सा।