कुछ नहीं तो भी मिशाल जिंदगी करूंगा।
इतना है कि शख्सियत में सादगी करूंगा।
आज अंधेरे अक्सर रहते हैं साथ साथ मेरे
उन्हें इल्म है, मैं एक रोज़ रौशनी करूंगा।
अब तो हर किसी की इनायत है मुझ पर
मैं भी सब को खुश रखने की बंदगी करूंगा।
मैंने हर बार बहुत जल्दी की है तुम्हें पढ़ने में
तो इस बार तुम्हें समझने में संजीदगी करूंगा।
मुझे इल्म है इश्क़ में यहां क्या गुजरती है
सो तुझसे उल्फ़त नहीं तुझसे दोस्ती करूंगा।
हकीकत है मुझे सब कुछ नहीं मिलेगा, पर
जो कुछ मिल जाए उसमें तसल्ली करूंगा।