जो रणभूमि में धनु-बाण छोड़ दे,
दुविधा में किसी के प्राण छोड़ दे,
विकट परिस्थिति में पद-भार छोड़ दे,
अन्याय होने पर कलम का भार छोड़ दे,
सांझ का रवि नहीं हूं मैं!
ऐसा कवि नहीं हूं मैं।।
अपने समक्ष किसी को लाचार छोड़ दे,
जो ठीक होसके उसका उपचार छोड़ दे,
किसी दुख में आंसुओं का धार छोड़ दे,
षड्यंत्रों में संयम का आधार छोड़ दे,
किसी प्रतिमा का छवि नहीं हूं मैं!
ऐसा कवि नहीं हूं मैं।।
कठिन पूछें प्रश्नों पर प्रभार छोड़ दे,
संतों से संस्कार का आभार छोड़ दे,
सौंदर्य की पूजा कर निराकार छोड़ दे,
सम्मोहन में आकर संस्कार छोड़ दे,
सिर्फ सिंगार का जनकवि नहीं हूं मैं!
ऐसा कवि नहीं हूं मैं।।
एक पल के पतन पर संसार छोड़ दे,
विजय दिग्विजय का आसार छोड़ दे,
किसी का तेज देख तलवार छोड़ दे,
युद्ध जीते बिना रण का द्वार छोड़ दे,
अस्त होता हुआ अवि नहीं हूं मैं!
ऐसा कवि नहीं हूं मैं।।