ज़िन्दगी को छू लें
मरने से पहले क्यों न एक बार
जिंदगी को छू लें
आँखों आँखों में बातें करें और
कुछ एक जाम पी लें
सभी शिकवे भुला दें
न रूठे न मनाएं
ज़माने की नज़रों से बचा कर
कुछ हंसी पल चुराएं
चलो सागर में गोता लगाएं
लहरों से खेलें
बच्चो से भागें
रेत के घर बनायें
किसी मधुर धुन में खो जाएँ
प्यार के गीत गुनगुनाएं
मस्ती में झूमें
और होश गवाएं
जुदाई से पहले
मिलन की तड़प जगाएं
नींदे उड़ाएं
सोये जज्बात भड़काएं
प्रस्तुति - वीरेन्द्र जैन


