वहशत...
शहर के शहर बिक गए,
सब कारोबार बिक गए,
वहशत इतनी बढ़ गई,
सभी अखबार बिक गए।
खुदा का नूर बिक गया,
बड़े किरदार बिक गए,
रहमो-रूह बिक गए,
सभी सरोकार बिक गए।
ये कैसी जंगे-आमद है,
सभी व्यापार बिक गए,
किसी का कुछ बचा नहीं,
दरो-दीवार बिक गए।
मुहब्बत में फना होंगे,
जो कहते थे न जुदा होंगे,
वो तुम भी यार बिक गए ,
और हम भी यार बिक गए।
Vikram...


