बांहों में मुझे कस लें, आ गले से लगा ले मुझको,
मैंने हाथ बढ़ाया है, एक मुठ्ठी दे उजाले मुझको।
तेरे नाम से जिंदा हूं,तेरे नाम से ही मर जाऊंगा,
पर तुझे ये मैं कैसे कहूं कि अपना बना ले मुझको।
तू अजाब इबादत का है, मैं असर बद्दूआओं का,
तेरी हस्ती पे मिट जाऊंगा चाहे तो आज़माले मुझको।
तु कबीर समंदर है और मैं अदना सा कोई दरीया,
तु चाहे तो मुझे बहने दे, तु चाहे तो बहा ले मुझको।
मैं तो छूप गया हूं बड़ी देर से खुद ही खुद के भीतर,
बस अब मैं ये चाहता हूं तुही ढुंढ के निकाले मुझको।
अरे अब तो मेरी खाक से भी तेरी ही खूश्बू आएगी,
तुझे देखना है तो आजा, आके जला ले मुझको।
