बहुत तेज़ हो रही है सुनो, कल शाम से बारिश,

जैसे भीगो गई थी मुझे कभी तेरे नाम से बारिश।


जब से गई है तु तेरे हाथों में महेंदी लगा कर,

बहुत कर रहा हूं मैं सुनो, भरे जाम से बारिश।


किसी को पता चले नहीं कि बहुत रो रहा हूं मैं,

मौसम भी कर रहा है सुनो इसी एहतराम से बारिश।


मेरा मुकद्दर हर हाल में युं ही तय रहा है मुसलसल 

कभी आगाज़ से बारिश तो सुनो कभी अंजाम से बारिश।


नियाज़ी का ख़ुदा से वास्ता बहुत अच्छा रहा है सुनो,

वो भेजता रहता है मुझे दुआ-सलाम से बारिश।