साहब... 


अरे मैं तो नीम चढा़ करेला हूँ साहब,

बहुत कड़वा और ज़हरीला हूँ साहब।


आपको चाहिए कोई सफेदपोश इसाँ, 

मैं तो सुर्ख बहुत चटखीला हूँ साहब।


आपको खामोशीयाँ ही रास आती है, 

मैं शफ्फा़क हूँ बर्क सा भड़कीला साहब।


तुम भी ज़रूर शिफा के तलबगार होंगे,

अरे मैं तो गठिया सा हठीला हूँ साहब।


सब यहाँ खुद ही में कितने खोए हैं,

मैं यहीं बेखुद हूँ तभी चमकीला हूँ साहब।


Vikram... 

बर्क -बिजली, शफ्फा़क - ज़गडालु, शिफा - स्वास्थ्य