रावण...
तुम थक जाओ, मूड जाओ या रुक जाओ,
पर मेरी ज़िम्मेदारी है मुझे तो चलना है।
हैं झूठ के पहरन में हत्यारे सब छिपे हुए,
काफी परदादारी है अब वख़्त बदलना है।
बड़े बड़े मुझसे कई रावण शहर में घूम रहे हैं,
पर मैं वो रावण हूँ जिसको सदीओं जलना है।
सिर से पा तक घायल हूँ मैं तुम्हें क्या बोलुं,
पर आँगन में आ गया समर मुझे लड़ना है।
फिर एक पुरानी याद कहीं से निकलेगी,
फिर जीभरके रोना फिर दिल का बहलना हैं
Vikram...


