रस्म
ज़िन्दगी कौड़ीओं के दाम खरीदी गई थी मेरी,
मौत मेरी अब लाखों-करोड़ों में बेची जाएगी।
मैं जिन्दा था तो किसी ने हाल नहीं पूछा मेरा,
मैं मर गया तो मुझ पर किताबें लिखी जाएँगी।
कभी जो लोग मेरे मरने का सबब हुआ करते थे,
मेरे जनाज़े में उन्हीं लोगों की भीड़ जुटाई जाएगी।
मैं तो घुट घुट के खुद ही में मर गया था कब का,
बस बाकी एक रस्म है जो रो रो के निभाई जाएगी।
कौन आया है यहाँ बे-जाँ मेरा जिस्म जलाने के लिए,
यहाँ तो मिल-झुल के मेरी शोहरत जलाई जाएगी।
Vikram...


