मकबूल...
मैं तेरी दुवा-ए-विसाले-यार हूँ,
मुझे माँग ले, मुझे कुबुल कर।
मैं तुझमें बह रहा हूँ एक खयाल सा,
गले लगा मुझे या फिजूल कर।
मैं तो सच में तेरी हर अदा में हूँ,
मैं तेरी हर आरज़ू, हर दुवा में हूँ,
मैं तेरे हर जहर, हर दवा में हूँ,
मैं तेरे इश्क़ में, मैं तेरी वफा में हूँ,
तुझे याद हैं मैं खुदा का था,
मैं आज भी तेरे खुदा में हूँ।
तु मेरी रगों में है मेरे खून सा,
तु मेरी नींद में है सुकून सा,
मेरी ज़ात का गुमान है तू,
मेरे ख्वाबों का आसमाँ है तू।
तुझे याद है तु मेरी जान था,
अब तु मेरी जाँ में है मेरे जुनून सा।
जो तु नहीं तो मैं कुछ नहीं,
आ मेरी जान ले मुझे मक़तूल कर।
मैं तो ज़ूलमत हूँ मेरे आफताब आ
मुझे गले लगा मुझे मकबूल कर।
Vikram...

