मैं...
मैं तेरे मयखाने से भी बीन पीए चला आता हूँ,
वहाँ ऐसी कोई मय ही नहीं जो मुझे बासुरुर करे।
वो बेसबब मेरे काँधे पर रखे सिर तो कोई हर्ज नहीं,
पर उनसे कहदो न मुझसे इश्क़ करें न मुझे मजबूर करे।
मैं तो ऐसा ही हूँ और आगे भी ऐसा ही रहनेवाला हूँ,
अब ये ज़माने पर है वो मुझे कितना बदशउर करे।
अब मुझे कोई भी मतलब नहीं रहा इस ज़माने से,
चाहे तो गले लगा ले मुझे चाहे तो खुद से दूर करे।
मैं तो वो शम्मा हूँ जो तूफ़ान में जलती है अक्सर,
हवा से कह दो वो रुक जाए ना इतना ग़ुरूर करे।
Vikram...


