किस्से... 

ये ज़िन्दगी तो कुछ औराक-ए-परेशाँ में बँट गई,

जो जुड़ ना सके एक साथ वो किस्से तुम्हारे थे। 


तू चाहे आज किसी और की बाहों में है तो क्या, 

क्या याद है तुझे मेरे साथ जो लम्हें गुज़ारे थे। 


तु एक ख्वाब है जो आज भी आँखों से नहीं जाता, 

तेरे बाद भी मेरी जिंदगी के सब मसले तुम्हारे थे।


तु तो ऐसे गया जैसे कोई कभी भी जाता नहीं है,

फिर एक जाम, कुछ दोस्त, कुछ किस्से तुम्हारे थे। 

Vikram...

औराक-ए-परेशाँ-scattered pages..