किसान... 


किसानों ने हलों को हथियार बनाया कैसे,

कहते हैं हंसियों पे गरदनों को लगाया जाए।


माना के रोटी देते हैं तो दाम भी तो लेते हैं,

और ये शर्त कैसी के तिरंगे को झुकाया जाए। 


देखलो आज भी दिल में कोई भी रंजिश नहीं, 

पर अब दिल खोल के कैसे दिखाया जाए। 


वो ही देते हैं पहले ज़िम्मेदारी हुक्मरानी की,

वो ही कहते हैं कोई कानून न बनाया जाए। 

Vikram...