कहीं मुझे ज़िंदा दफनाया जाएगा।
और वहीं एक पौधा लगाया जाएगा,
जब किसी भीड़ का हिस्सा नहीं बनुंगा मैं,
तभी फिर मेरा ही घर जलाया जाएगा।
हां अपने बच्चों के लिए डर गया हूं मैं,
और अब मुझे बहुत डराया जाएगा।
माना आज मुझे कहीं सुना नहीं जाता,
पर कल मुझे हर दश्त में गाया जाएगा।
किसी दौर में सुखनकारी सीखने के लिए,
मुझे ही ओढ़ा जाएगा,बिछाया जाएगा।
मैं अपने शेरों में बो रहा हूं किस्से जो,
देखना उन्हीं से इन्कलाब उगाया जाएगा।
Vikram...
