चलो आज तुम से कर ही देता हूं इकरार मैं,

सोम और शुक्र तुम्हीं से करता हूं प्यार में।


मंगल और गुरु तुम्हारी पडौसन को दे रखे हैं,

तुम्हारी सहेली को देता हूं बुधवार मैं।


शनिवार मेरा हनुमानजी का व्रत रहता है,

इतवार को करता हूं नये-नये शिकार मैं।


वो जैसा-जैसा पसंद करती है संइया,

ओढ़ लेता हूं वही-वही किरदार मैं।


लोग मुझको सीधा सादा समझते हैं लेकिन,

छुपा-रुस्तम हूं, हूं मंझा हुआ कलाकार मैं।


Vikram...