हाहाकार...
आवाज़ नहीं चित्कार सुनो,
हर शख्स में हाहाकार सुनो,
रुँधती साँसे और बहते आँसू,
क्या बस वायु है, बस पानी हैं,
बहना छोड़, बचना भी छोड़ो,
अब तो अंतर मन उद्ग़ार सुनो।
युद्ध रचो, सिंह हुंकार करो,
विद्रोह विदित है गीता में भी,
कोलाहल है हर जन-मन फैला,
अब तो केशव-मन-संचार सुना।


