गौर करें, कभी भी इनकार नहीं किया उसने, 

बस हाथ पकड़ने में रुसवाई का डर लगता था। 


वो आसमान का चाँद था, मैं पत्थर का टुकडा, 

मुझको तो उसकी रौशनाई से डर लगता था। 


वो तो ख़्वाब सजाए बैठा था लैला-मजनु वाले, 

मैं पगला था मुझको उसकी रानाई से डर लगता था। 


मैंने उसको अपना खुदा मान लिया था लेकिन, 

पर नये-नये खुदाओं की बेवफ़ाई से डर लगता था। 


वो कहता था हम रिश्ते को अपने कोई नाम ना दे, 

उसको ज़ुठे रिश्तों की गहराई से डर लगता था।

Vikram...