Title : चलते रहो..  

डरो मत, रुको मत, चलते रहो, 

आग सीनेमें है, तो फूंको मत, जलते रहो।


बड़े ज़ुनूनसे समेटा है तुमने ज़िंदगीमें खुदको,

उसी जुनून से आसमाँं से आगे निकलते रहो।

अब वक़्त ही तय करेगा मिजाज़े-माज़ी, 

फिर वक़्त बदल रहा है तुमभी बदलते रहो। 


राहमें मुश्किलों की काली परछांईयाँ होंगी, 

बड़ी बहुत बड़ी वादीयों की गहराईयाँ होंगी।

हुंकार करो के तुम हो, मचलते रहो, 

किसी बहते हुए जिद्दी दरियासे उफनते रहो। 


दुश्मन बहुत होंगे बहुत रुसवाईयाँ होंगी, 

हाथ खाली जेब में सिर्फ सच्चाईयाँ होंगी। 

पीठ में हजारों खंजर हो, लड़ते रहो,

सामने शाहै जहाँ भी हो ज़िद, पर अड़ते रहो। 

Vikram...