वो एक चहरे पर है लगाए हुए हज़ार चहेरे,

नई कहानी कोई सुनाते नए हरबार चहेरे।


एक मुद्दतसे मेरी दरयाफ़्त करते चहरे भी हैं,

और एक मुद्दत से मुझे घूरते बे-मयार चहेरे।


कहीं दीवार पर फ्रेमों में खोए चेहरों की यादें

वो सभी सीने से लगाते हुए बार-बार चेहरे।


कहीं पे आईनों को तकते हुए दीवार चहरे,

कहीं उन चेहरों को तकते हुए खरीदार चेहरे।


कहीं है भुख से मरते हुए चेहरों की सिसकी,

वहीं पर भीड़ में हंसते हुए बेशुमार चहेरे।

Vikram...