अकेला
मैं शहर भर को जानता हूँ
पर अकेला हुँ।
भीड़में एक- एक चेहरा पहचानता हुँ
पर अकेला हुँ।
आओ तुम भी गले लगो मेरे,
तुम्हें भी अपना दोस्त मानता हूंँ
पर अकेला हूँ।
किसने गले लगाया ,
किसने पिरोया खंज़र,
कितने बहाये आँसू ,
जब निकला मेरा जनाजा,
मैं सब जानता हूँ,
पर अकेला हूँ।
मैं आसमाँ का परिंदा,
जमीन पर आ गिरा हूँ,
फिर आसमाँ में उड़ना,
अपना हक मानता हूं,
पर अकेला हूँ।
Vikram Dave

