बहूत आसान होता है,

हथियार उठाए लड़ जाना,

मुश्किल होता है साहब,

सह लेना आगे बढ़ जाना।

भीड़ बनाकर लोग कई,

गलत बातें भी मनवा लेते हैं,

मुश्किल होता है अकेले,

बात गलत पर अड़़ जाना।

उजियारे छीने जाएंगे,

और अंधियारे थोपे जाएंगे,

कुछ लोग बुलाकर,

भीड़ जुटाकर पत्थर मारे जाएंगे,

झंडे उठाए लोग आएंगे,

फिर घर कुछ गिरवाए जाएंगे,

आसान होता है ऐसे में,

हथियार उठाना, पूरे बलसे टकराना।

मुश्किल होता है लेकिन,

ना लड़ना, ना डरना, ना झुक जाना।

Vikram...