आदमी... 


हर एक ओर हर तरफ हैं बेज़ार आदमी, 

एक आदमी की जगह, एक हजार आदमी।


राह पर बीछ गए हैं कई लोग हर जगह, 

बन गए हैं कहीं छत कहीं दीवार आदमी।


भूख इतनी बढ़ गई के गुस्सा आ ही गया,

झुंड के झुंड बन गए बेरोजगार आदमी।


तुम तो अपने महल में जाके सो जाओगे,

यहाँ बेवजह मर रहे हैं मगर बीमार आदमी।


इतना ज़ुल्म भी न कर के कोई सह ही सके, 

फिर थक गए तो उठा लेंगे हथियार आदमी।


Vikram...