अभी भी वहाँ है... 


उसकी गली के नुक्कड़ पर वो चाय की दुकान, 

अभी भी वहाँ है या वो दहेज में ले गयी।


वो वहीं टुटा-फूटा तोतेवाले पंडित का मकान, 

अभी भी वहाँ है या वो दहेज में ले गयी।


वो गत्ते के डब्बे में गुडीयों की शादी का सामान, 

अभी भी वहाँ है या वो दहेज में ले गयी।

 

वो खुशबू वो रौशनी वो तितलीयों वाला मैदान,

अभी भी वहाँ है या वो दहेज में ले गयी।


वो परीओं के शहरों की कहानी वाली दादीजान, 

अभी भी वहाँ है या वो दहेज में ले गयी।


मेरे बचपन और लड़कपन की यादों का आसमान,

अभी भी वहाँ है या वो दहेज में ले गयी।

Vikram...