धोखा दिया तूने मुझे ओ रे पिया
चन्द दिन संग मेरे ना जिया ओ रे बैरी पिया
कैसे रहूँ तेरे बिना रहा नही जाता मेरे पिया
नही जीना अब मुझे तेरे बिना सोच कर हाल बुरा है
क्यों धोखा दिया संग में चली थी
हर कदम पर ये काँटों की शेज मुझे
क्यों दिया जहर घोल कर तूने क्यों मुझे
दिया अब ना जलेगा प्रेम का
कोई दीया ऐसा उपहार मेरे इंतजार का दिया
आई है रात मेरी बिना चांदनी की
ना पायल छनकाई
ना राग कोई गाया
क्यों छीन लिया मुझसे अपना साया