लहराता तिरंगा देख रहा,
हम सबकी राहें..
कि कोई भुला दे इसकी खातिर,
अपनी अमिट इच्छाएं..
आज़ादी तो मिली है हमको,
खुली छूट हम पाएं..
विचारों की अभिव्यक्ति में देखो,
हम कर्तव्यों को भूल न जाएं..
कि किसी दिन किसी मोड़ पर
कोई इसका मान बेच न पाये..
कुछ नीच ऐसे भी बैठे,
अज़गर से धुनि रमाए,
सुबह हुयी या शाम हुयी
बस करते हैं दुआएं..
कि हम भारत माँ के बच्चे आपस में,
लड़ लड़ कर मर जाएँ..
हमने किया न कुछ, शायद अब भी न करेंगे,
लेकिन कुछ तो जतन कर जाएँ..
लगे बहुत थे, लगे बहुत हैं ,बहुतेरे लगे रहेंगे,
बस भारत माँ को कोई नोंच न पाए..