
अरे!बताओ कब बोलोगे?
अपनी होगी तब बोलोगे?
कब तक वहशी हैवानों को,
जाति के पलड़े पर तोलोगे?
अरे!बताओ कब बोलोगे?
कब तक नोचेंगे ये गिद्ध दरिंदे,
माँ केे आंचल की बगिया को?
कब तक देखेगा बाप बेचारा,
रात में जलती अपनी बिटिया को?
बंद मुंहों को कब खोल
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