अजब सी है ये जिन्दगी सिसकती रोज रहती है तडपती रोज रहती है सिकुड़ती रोज रहती है इश्क भी हो गयी अंगारो सा धधकती रोज रहती है ख्वाब तुजे पाने का अब बिछुड़ती रोज रहती है अजब सी हो गयी है जिन्दगी सिसकती रोज रहती है