आओ हम इश्क की बात करते है
चलो बिछड़ जाए एक बार फिर से
फिर से नयी शुरुआत करते है
रहते है एक शहर मे अजनबियो कि तरह
फिर से कही तकराएंगे तब आंखे चार करते है
चलो अरमानो को दफन करके इस दिल मे
अब रुह को भी आराम देते है
ख्वाब मुक्कमल न सही तो अधूरा ही सही
आओ फिर से मिलते है और पुराने गीतो को नया राग देते है
हम इश्क है हमे बर्बादी का कैसा डर
हम तो आपनो का भी खंजर दिलो मे सरे आम लेते है
ए जमाना आवारगी का तोहमत ऐसे तो न लगा
हम तो इश्क है लेकिन अब तो इश्क से भी इनकार करते है
रहूंगा तेरे दिल मे मै तो ख्वाब की तरह
आओ हम मिल के अब इश्क को बेनकाब करते है
“आओ अब इश्क को हम एक हसी मोड़ देते है
मयखाने से उठा के इसे मन्दिर तक छोड़ देते है
बेवफाई तो इश्क कि पुरानी रीत है
चलो इसे भी हम इश्क पर ही छोड देते है”