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"सिखलाने से नहीं आती फकीरी की अदा सारी" - विवेक मिश्र

सिखाने से नहीं आती, फकीरी की अदा सारी |

ये रहमत छीन लेती है, जमाने भर की सब यारी ||


हर लम्हा एक कतरा है, हर कतरा भी तो लम्हा है | 

कतराने की मोहब्बत में लम्हे ने ज़िन्दगी हारी ||


चुप बैठोगे तो इल्जामों का करे सौदा बन व्यापारी |

बोलने पर भी तो पागल का करता है फतवा जारी ||


जीवन का मोल पहचाने वक़्त की है समझदारी |

ये दुनिया चार दिन की है व् रातें मुफ्त बेचारी || <

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