"कर्म युद्धपथ" - विवेक मिश्र's image
Poetry2 min read

"कर्म युद्धपथ" - विवेक मिश्र

विवेक मिश्रविवेक मिश्र July 17, 2022
Share0 Bookmarks 10927 Reads1 Likes
विनय न मानने पर क्रुद्ध होना राम का अधिकार है,
विश्व शांति लक्ष्य पर बुद्ध का मुस्कुराना स्वीकार है,
है परमात्मा अंश आत्मा धर्मयुद्ध जिसका श्रृंगार है,
हो न चिंतित पार्थ किंचित जब संग में पालनहार है,

छोड़ मत यूँ गांडीव को सम्मुख शत्रु की ललकार है,
यहाँ न कोई रिश्ता नाता आत्मा शुद्ध व निर्विकार है,
बढ़ कर वर ले विजयमाल तू तो धर्म का पहरेदार है,
 हो न चिंतित पार्थ किंचित जब संग में पालनहार है,

काट

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts