ट्रेक्टर 


मुझे भी ख़रीदना है एक ट्रेक्टर 

और जाना है दिल्ली

सारी मजबूरियाँ भूलकर

मुझे भी देखना है लाल क़िला

ट्राली की पींघ में झूलकर


मुझे देखना है

वो कूड़े का पहाड़ 

वो लोहे की दीवार 

दौड़ना है उन कीलों पर

पहनने है अपने गले में वो हार

सरकार के गूँथे 

कँटीले तार


मुझे भी छकना है 

गुरुओं का लंगर

वहाँ कृपा है असीम

वहाँ अनिवार्यत: होंगे गुरू आसीन

वहाँ लगा है मेला

बैठी है संगत

मुझे भी बोलनी है बोली देसी

काटनी है पौश की रात 

औढ के खेसी

मुझे बैठना है जहाँ बैठी है बिरादरी 

मुझे भी जाना है तिहाड़


यूँ भी मेरा जीवन तुच्छ है

मुझे हो जाना है अर्पित

आंदोलन के पथ पर


-हल बैल वाला किसान