जल - जंगल
हमने पत्थरों को माना देवता
काश वृक्ष पूजे होते
हमने वृक्षों को माना सामग्री
काश विकल्प खोजे होते
हमने कुल्हाड़ियाँ खोजी
और विकसित किए आरे
बकरियाँ ईंधन की लकड़ियाँ
काश प्राथमिकता में पौधे होते
हमने जल को बाँटा जातों में
थोड़ा मंदिर में चढ़ाया
बहुत गटर में बहाया
काश कूप खोदे होते
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हमने उद्योग लगाए
शहर बढ़ाए
दूर दूर तप महामार्ग पंहुंचाए
काश सरोवर भी गहराए होते
हमने जलचक्र को समझा
जल-पृथ्वी दिवस मनाए
और आश्वस्त हो गए
काश हीट बजट पढ़ाए होते
हमने ईको क्लब बनाए
तख़्तियाँ चमकाई
नारे लगाए
काश दो ही पौधे लगाए होते
हमने किताबों पर रगड़े माथे
हम जानते है सारी किताबी बातें
हमने बाँटे अंक काग़ज़ों पर शब्दों के उगे जंगलों पर
काश झाड ही उगवाए होते


