जगाओ मेरा देश
कल जब अस्पताल कम पड़ गए थे
ओर मंदिरों मठों मे जड गए थे ताले
शिवलिंग ने त्याग दिया था दूध पीना
गिरजों मश्जिदों मे लग गए थे जाले
पांडे पुजारी सब अमान्य अशक्त
ज़मींदोज़ हुए मुहम्मद के रखवाले
कल जब हम चीख़ रहे थे त्राहीमाम
जान बचाने के पड़ गए थे लाले
रेल, फ़्लाईट, केंटर बन गए सेंटर
स्टेडियमों मैदानों में पड़े थे तंबू डाले
सूनी बाटे बस अड्डों पर बिछ गई खाटें
स्कूल कॉलेज आपातकाल के हवाले
आपदा का फ़लसफ़ा हमने कख ना सीखा
आँख मूँदके धूप में ऊँघते किए दिन काले
कल जो वादा था बड़ा सख़्त इरादा था
कि बनाएँगे अस्पताल के ऊँचे सौ सौ माले
क्या हुआ? वो हवा हो गए..नेक विवेक मर गया?
या बस मोहरे हो तुम?चलती नहीं वज़ीरों के आगे
हमको फिर भी मंदिर ही चाहिए भव्य - अद्वितीय
हम-हमारी दुम सीधी ना होगी हम रूढ़ियों के पाले
सब लाज सरम सोंच समझ पर गोबर पोतकर
लो आ गए राष्ट्र जगाने वाले चंदा उघाने वाले
जगाओ मेरा देश
जगाओ मेरा देश
जगाओ मेरा देश
-विवेक


