बच्चे


बच्चे लौट आए है जीवन में 

महज़ तीन ही महीनो में बचपन लौट आया उनका 

हमारे विद्यालयों ने मानो 

अपाहिज कर के रखा था इन्हें 


ये बच्चे पिल्लों से बतीयने लगे है 

बकरीयों से मेमनो को हथ्याने लगे है 

इनकी भुजाएँ बढ़ गई है 

इनकी गालें भर गई है 

सिर उठा के चलते है 

ग्रहस्ती का छोटा छोटा बोझ उठाने लगे है 


ये बच्चे बैलो को पकड़कर कानों से

जोतने लगे है 

नालों के सारे प्रपात और

जंगलों के चप्पे खोजने लगे है 

इन्होंने सीख लिया है भैंस दुहना 

खेतों में जाने लगे है 

खलीयान चलाने लगे है 

ये बच्चे अगले साल फ़सले उगाएँगे 

भूखी दुनिया की भूख मिटाएगे।


ये बच्चे ऐक दिन सरहद पर जाकर 

सुलह कर आएँगे 

उस तरफ़ के बच्चों से

हाथो में हाथ डाले 

उँगियों में ऊँगली पिरोए  

सरसों के खेतों में दोड़ेगे 

हम जो ना कह सके दो मीठे बोल बोलेंगे 

अपने नाज़ुक हाथो से 

वो कँटीली बाड खोलेंगे। 


तुम्हें गर जारी रखना है 

ये बारूद का कारोबार 

ये टैंकों तोपो की ख़रीद फरोकत 

सैंधमारी सीजफ़ायर की क़वायद  

कत्तल करने ओर शहीद होने की रवायत 

तो जल्द से खोल डालो स्कूल अपने 

दबा दो इन्हें किताबों के वरक़ों में फिर से 

की सर ना उठा पाए कमजरफ।