उसकी आँखें कि समंदर क्या है ,
उसकी बातें कि सिकंदर क्या है |
गुज़रे जिधर कयामत उधर ,
जुल्फ़ें हैं कि बवंडर क्या है |
जो गर्दन उठायें तो चाँद फीका है ,
अदाएं कि हाय धुरंधर क्या है |
कहती हैं कि बन्दर दिखते हो ,
साफ़गोई कि क़लन्दर क्या है |
एक दीदार में सब ख़्वाब मुकम्मल है ,
उनके बाद देखने को कि बचा मंज़र क्या है |