ऐ ज़िन्दगी तुझसे शिकवा नहीं

के देती क्यों खुशियां नहीं।

शायद मैं अभी काबिल नहीं

मैं अग्रसर हूं स्थिर नहीं।

बनूंगा एक दिन काबिल

अब ज़्यादा देर नहीं।

आएगा वो दिन जब होगी

मेरी मंज़िल मुझसे दूर नहीं।


-vvk