मेरे दिल, मेरे अमन, मेरे चैन मुझसे वास्ता रखो न
मेरे साथ रहने का किराया सस्ता रखो न।
जाने कितने मकां हैं तुम्हारे, मेरे गांव में
किसी एक का तो खुल्ला रास्ता रखो न।
भरे सावन में ये गमले सूखे अच्छे नहीं लगते
इनमे ज़रा सी हरियाली तो रखो न।
माना बारिशें कम हो रही हैं आजकल
"विवेक", थोड़ा ख्याल तुम भी तो रखो न।

