यूं पेड़ो से बाते करना
क्या उसको भी भाया होगा
सुमनो में उनके उसने
क्या मुझको ही पाया होगा
कहो मित्र एक बात बताओ
उसने कोई प्रेम कहानी
क्या तुमसे भी गाया होगा
यूं पेड़ो से लिपट लिपट कर
जैसे प्यार जताता हूं
क्या उसने तुमको छू कर
मुझको प्यार जताया होगा
तेरी टहनी से अक्सर
जैसे झूला करता हूं
क्या उस टहनी को छूना
उसके दिल को भाया होगा
मित्र सखा तुम मेरे हो
एक छोटा तुम काम करो
छाया का हर कतरा कतरा
उसके ही तुम नाम करो
तेरी छाया में अक्सर
जैसे मै सो जाता हूं
तेरा उसको छाया देना
क्या उसको भी भाया होगा
यूं पेड़ो से बाते करना
क्या उसको भी भाया होगा....


