जब सोचता हूँ कि क्या ख्वाब हक़ीक़त होते हैं
तो बस ख्यालों में एक फ़रियाद आ सी जाती है
पता नहीं कुछ सवालों के जवाब पर जब तुझे देखता हूँ
तो बस रुखसत होते ही तेरी याद आ सी जाती है
ऐसा तो सोचा न था कि तू आएगी इस तरह
ख्वाबों की दुनिया से निकलना कभी होगा कहीं
बस कश्मकश में बीती सी जाती थी ज़िन्दगी
हक़ीक़त की दुनिया में मिलना कभी होगा कहीं
कुछ शक सा होता है की ये ख्वाब ही है या फिर फ़साना
जो करीब सा होकर भी अजब सा अफसाना लगता है
तू दूर भी है और पास भी कुछ ऐसी कुछ समझ नहीं आता
पर तेरा दीदार करते ही ये दिल दीवाना सा लगता है
हम तो तुम्हारी नूरानी अदा पर कुछ इस तरह दीवाने हैं
की एक खुमार तुम्हारी याद का इस ज़हन में रहता है
यूं लगता है की बस बाहों में लेकर बहुत प्यार करें तुझे
इस ख्याल का एक नशा इस वीराने दिल में रहता है
कैसे तुझे मनाएं, तुझे अपना बनाएं, दिल चुराएं तेरा
यूं समझ ले कि तुझे तुझसे चुराने का ही एक सवाल है
क्या बताएं दिल की बात सब कुछ बयां होता नहीं
यूं समझ ले कि तुझे अपना बनाने का ही एक ख्याल है
हर सवाल के ज़हन में कुछ छिपी है तू कुछ ऐसी
बस तेरा दिल की चुराने का अब एक ही जवाब है
तरस रहे हैं कि तू करीब आये और आती ही रहे
बस तुझे तुझसे चुराने का अब एक ही ख्वाब है
