इस रंग बिरगें सावन में शायद बदलाव का रंग होगा

कोई अपना सा पास होगा जो ख़्वाबों सा हसीं होगा

कुछ होगा बदला सा रंगों के इस बदलते मौसम में

कोई प्यारा सा एहसास होगा जो हक़ीक़त सा हसीं होगा


कैसे कहा जाए कि कुछ बदला है इस मौसम में

ख्वाब जैसा कोई समां रवायत सा हो गया है

जो उलझा था ज़हन में अपना कुछ खोया सा

ख्याल जैसा कोई खुशनुमा हक़ीक़त सा हो गया है


यूं तो रंगीन सी बारिश में कोई रंग ऐसा भी है

जिसका असर प्यारा सा उलझा कहीं खोया सा है

शायद उस रंग की रंगीनियत समझ सको तुम

जिसका सफर ख्वाबों की बारिश ने भिगोया सा है


सूरत पर लगाके वो रंग हम तुझे मह्सूस करते हैं

तेरे हुस्न को छूनेवाली उस बयार को हम तरसते हैं 

एक तू है जो उलझी है अपनी सी वीरान इस दुनिया में

तेरे मन को रँगनेवाले उस प्यार को हम समझते हैं 


शायद मौसम की रंगीनियत अगर समझ में आती

तो रंगो की रंगीनियत में हम तुझे तुझसे चुरा लेंगे 

कभी तो ढूंढ लेंगे तुझे हम इन उलझे संभलते रंगों में

बदलते सावन की इबादत में तुझे अपना बना लेंगे


तू हक़ीक़त है खोयी सी ख्वाबों की हमारी 

तेरे हुस्न की हम बेपनाह इबादत करते हैं

खुदाई नूर में उलझी है तेरी तस्वीर कुछ ऐसी

तू और तुझसे हम बेपनाह मोहब्बत करते हैं