यह सच है कि
शिक्षा के क्षेत्र में प्रभाव आया है,
सबकी सोच से सिकुड़ता हुआ दृश्य
और उस दृश्य में आभाव आया है।
रोज़ के प्रयोगों से तंग आकर
एक शाम चुपके से
फूंक देगा सारी प्रयोगशालाएं, विज्ञान!
और बचने के लिए सश्रम कारावास से,
भेस बदलकर
कला या वाणिज्य की शरण लेगा।
हां, यह वही विज्ञान है!
जिसने आपको संबल दिया है,
शक्ति और साधन प्रदान किया है।
जी, वही विज्ञान जिसके बल से
आप खुद को समृद्धवान पाते हैं,
उंगलियों से लेकर संगणक तक की
मदद ले पाते हैं।
जरा सोचिए
कितना दुखद होगा
अस्तित्व से विहीन हो जाना,
जैसे आविष्कार का अंत हो गया हो,
या किसी खोज की रात लंबी हुई हो।
और फिर हर सुबह वह सुस्त होकर,
ऐसे बैठा रहेगा,
जैसे उसे सेवा निवृत्त कर दिया गया हो,
या समाज में उसके काम का
कोई मोल न रह गया हो।
फिर हर शाम
लटकाकर पैर वो देखेगा सूर्यास्त,
क्षितिज के उस पार से।
-विवेक कुमार श्रीवास्तव
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