माँ एक एहसास

बच्चे के रोने पे

भूख समझ लेने का

पिता के डाट पे

प्यार वाले लेप का

हर आती हुई नींद को

थपकियाँ देके सम्हालने का


माँ एक विश्वास

कैसा भी वक़्त हो

हरदम साथ पाने का

हर काँटों से बचा के

बाहर निकाल लाने का

हमारी गलतियों पर भी

माफ़ कर भूल जाने का


माँ एक त्याग

खुद गीले और

हमें सूखे में सुलाने का

हमारी जरूरतों पे

खुद की ख्वाहिशें मिटाने का

हमारी खुशियों में

खुद की खुशियाँ भूल जाने का


माँ एक जवाब

बचपन के हर

ना पूछे जाने वाले सवालों का

प्रस्फुटित अंकुर को

कली और फूलों से सजाने का

बिखरे हुए घर को

सुन्दर सजीव मंदिर बनाने का


माँ एहसास है, त्याग है, सेवा है

माँ तू तो सुबह का कलेवा है

ये कोई उपदेश नहीं, अध्याय नहीं

माँ के जीवन में कोई पर्याय नहीं

सारी पंक्तियाँ हैं तुम्हारे नाम

दुनिया की हर माताओं को मेरा प्रणाम