आओ जलाएं एक दीप ऐसा।
उजियारा हो सूरज की,
शीतल करे चाँद के जैसा।
आओ जलाएं एक दीप ऐसा।
मुरझाते चेहरे की
बन जाए हंसी,
रोते हुए दिल को
दे जाए ख़ुशी।
तपते बदन के खातिर
हो जाए छतनार,
भूखे उदर के लिए
उग आए फलदार।
सब संभव है तो सोचना कैसा,
आओ जलाएं एक दीप ऐसा।
देख राही को नंगे पाँव
पादुका दे वाहक बन जाए,
अन्यायी अत्याचारी मिल जाए
त्रिशूल ले संहारक बन जाए।
दुखियारी मानवता की ममता का
जीवंत बेटा योग्य बन जाए,
समृध्द खुशहाल देश का
स्वर्णिम भविष्य सुयोग्य बन जाए।
हर मौसम हो बसंत के जैसा,
आओ जलाएं एक दीप ऐसा।
है अँधियारा घनघोर घना
घबरा ना एक लौ दिखा,
बाधाएँ बन चट्टान ललकारें
उठा हथौड़ लोगों को सिखा।
लाख तूफां आए रस्ते में
डर ना बस तू बढ़ता जा,
बेड़ियाँ भल पड़ी हों पैरों में
हौसले से उन्हें काटता जा।
दिखे नजारा अपने मंजिल जैसा,
आओ जलाएं एक दीप ऐसा।
प्रण कर कभी ना तू रुकेगा,
कठिनाइयों के सम्मुख ना झुकेगा।
अपनों के बने चिराग
पापियों को हो शोले जैसा,
आओ जलाएं एक दीप ऐसा।
आओ जलाएं एक दीप ऐसा।


