कोई अंतर्मन को झकझोरे

व्यथित करे मन की माया

मानव अपना मन शांत करें

वसुधा तो विष से ही आया ।


नदियाँ जब झर-झर बहती है

काफी गलियों और नालों से

अवरोध बहुत आते पथ में

उत्तर धीरज परिभाषा है

शांति ही विजय की आशा हैं।


चित्त शांत रहे ,तो स्वस्थ सा मन

न तो विष सा भी घुल जाये

न क्षमा मिले, ना सफल जीवन

चाहे कितना श्रृंगार करे ,

या तो अहं का हो उबटन 

या शांतित्व का रसपान करे

मानव का चित्त शातं रहे ।


written by Vivek Choudhary